सावन की रिमझिम फुहारों, शिव भक्ति की गूंज और रक्षाबंधन की मिठास के साथ Lala Ramswaroop Calendar August 2026 का महीना शुरू हो रहा है। इस वर्ष अगस्त का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है, क्योंकि 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का महापर्व मनाया जाएगा, वहीं 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।
इस लेख में हम आपको लाला रामस्वरूप पंचांग के अनुसार अगस्त 2026 के संपूर्ण व्रत-त्यौहार, रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त, भद्रा काल की स्थिति, नाग पंचमी, सावन सोमवार, पुत्रदा एकादशी और कजरी तीज की विस्तृत एवं सरल जानकारी दे रहे हैं, ताकि आप अपने महीने की धार्मिक योजनाएं सही समय पर बना सकें।
अगस्त 2026 पंचांग विवरण (August 2026 Panchang Overview)
लाला रामस्वरूप रामनारायण पंचांग के अनुसार अगस्त 2026 का महीना श्रावण (सावन) मास के कृष्ण पक्ष से शुरू होकर भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में समाप्त होता है। इस दौरान सूर्य देव सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे सिंह संक्रांति का योग बनेगा।
| पंचांग विवरण (Panchang Detail) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| मास (Month) | श्रावण – भाद्रपद 2026 |
| विक्रम संवत (Vikram Samvat) | 2083 |
| शक संवत (Shaka Samvat) | 1948 |
| कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) | 1 से 13 अगस्त एवं 29 से 31 अगस्त |
| शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) | 14 से 28 अगस्त |
| सूर्य संक्रांति (Sun Transit) | सिंह संक्रांति – 17 अगस्त 2026 |
| ऋतु (Season) | वर्षा ऋतु |
सावन का पूरा महीना भगवान शिव की आराधना का महीना माना जाता है, जबकि भाद्रपद की शुरुआत के साथ ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश उत्सव की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जाप करने से मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

अगस्त 2026 के व्रत-त्यौहारों की सूची (August 2026 Vrat & Festivals List)
नीचे दिए गए कोष्टक में Lala Ramswaroop Calendar August 2026 के अनुसार पूरे महीने के प्रमुख व्रत और पर्वों की तिथि-वार सूची दी गई है:
| तारीख (Date) | दिन (Day) | पर्व / व्रत (Festival / Vrat) |
|---|---|---|
| 1 अगस्त | शनिवार | सावन शनिवार पूजा |
| 2 अगस्त | रविवार | संकष्टी गणेश चतुर्थी |
| 3 अगस्त | सोमवार | सावन तीसरा सोमवार |
| 4 अगस्त | मंगलवार | मंगला गौरी व्रत |
| 6 अगस्त | गुरुवार | कालाष्टमी |
| 9 अगस्त | रविवार | कामिका एकादशी |
| 10 अगस्त | सोमवार | सावन चौथा सोमवार, प्रदोष व्रत |
| 11 अगस्त | मंगलवार | सावन शिवरात्रि |
| 13 अगस्त | गुरुवार | हरियाली अमावस्या |
| 15 अगस्त | शनिवार | स्वतंत्रता दिवस एवं हरियाली तीज |
| 17 अगस्त | सोमवार | नाग पंचमी, सावन पांचवां सोमवार, सिंह संक्रांति |
| 19 अगस्त | बुधवार | तुलसीदास जयंती |
| 20 अगस्त | गुरुवार | दुर्गा अष्टमी व्रत |
| 24 अगस्त | सोमवार | पुत्रदा एकादशी, सावन छठा सोमवार |
| 26 अगस्त | बुधवार | प्रदोष व्रत |
| 28 अगस्त | शुक्रवार | रक्षाबंधन, सावन पूर्णिमा |
| 29 अगस्त | शनिवार | भाद्रपद मास प्रारंभ |
| 30 अगस्त | रविवार | कजरी तीज |
| 31 अगस्त | सोमवार | संकष्टी गणेश चतुर्थी (भाद्रपद) |
रक्षाबंधन 2026: शुभ मुहूर्त, भद्रा काल एवं पूजा विधि (Raksha Bandhan Shubh Muhurat)
भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को यह पर्व मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है।
पूर्णिमा तिथि का समय
पंचांग गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की शाम से शुरू होकर 28 अगस्त की शाम तक रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार रक्षाबंधन 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
भद्रा काल का विचार क्यों जरूरी है
पौराणिक मान्यता के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। कथा के अनुसार रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी गई थी, जिसका परिणाम विनाशकारी रहा। इसी कारण भद्रा-रहित समय में ही रक्षा-सूत्र बांधने की सलाह दी जाती है। 2026 में भद्रा का समापन सूर्योदय से पहले ही हो जाने के कारण, 28 अगस्त को दिनभर राखी बांधने का शुभ समय उपलब्ध रहेगा।
राखी बांधने के शुभ मुहूर्त
| मुहूर्त का प्रकार (Muhurat) | समय (Timing) |
|---|---|
| प्रातःकाल शुभ मुहूर्त | सुबह 07:35 से 09:10 तक |
| शुभ-चर चौघड़िया | सुबह 09:10 से दोपहर 12:20 तक |
| अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ) | दोपहर 11:57 से 12:48 तक |
| अपराह्न मुहूर्त | दोपहर 01:45 से शाम 04:20 तक |
| सायंकाल (प्रदोष काल) मुहूर्त | शाम 04:20 से 06:12 तक |
समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, अतः स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।
रक्षाबंधन पूजा की सरल विधि
- सबसे पहले थाली में रोली, अक्षत, दीपक, राखी, नारियल और मिठाई सजाएं।
- पूजा की शुरुआत गणेश जी और कुलदेवता के स्मरण से करें।
- भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखते हुए तिलक करें और अक्षत लगाएं।
- दाहिनी कलाई पर राखी बांधते हुए भाई की दीर्घायु की कामना करें।
- आरती उतारकर मिठाई खिलाएं, और भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन दें।
राखी बांधते समय एक प्राचीन पौराणिक श्लोक का पाठ करने की परंपरा है, जिसका सरल अर्थ है कि जिस रक्षा-सूत्र से बलशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी पवित्र सूत्र से भाई की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं भी प्रचलित हैं — जैसे माता लक्ष्मी द्वारा राजा बलि को राखी बांधना, द्रौपदी और श्रीकृष्ण के स्नेह-सूत्र की कथा, तथा मेवाड़ की रानी द्वारा सुरक्षा हेतु हुमायूं को राखी भेजने की ऐतिहासिक घटना। ये सभी कथाएं इस पर्व के पीछे छिपे त्याग, विश्वास और रक्षा के भाव को दर्शाती हैं।
हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस का संयोग (Hariyali Teej 2026)
इस वर्ष 15 अगस्त 2026 को भारत का स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज एक ही दिन पड़ रहे हैं, जो देशभक्ति और लोक-आस्था का सुंदर संगम है। हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं हरे वस्त्र और चूड़ियां पहनकर झूला झूलती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।
नाग पंचमी 2026 (Nag Panchami)
17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी मनाई जाएगी, जो सावन के पांचवें सोमवार और सिंह संक्रांति के साथ ही पड़ रही है। इस दिन शिवजी के गले में विराजमान नागदेवता की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन अर्पित करने और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से कालसर्प दोष में राहत मिलती है।
सावन सोमवार एवं मंगला गौरी व्रत (Sawan Somvar & Mangala Gauri Vrat)
अगस्त 2026 में सावन के चार सोमवार पड़ रहे हैं – 3, 10, 17 और 24 अगस्त। इन दिनों शिवभक्त जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। इसी के साथ सावन के हर मंगलवार को सुहागिन महिलाएं मंगला गौरी व्रत रखती हैं, जो सुखी वैवाहिक जीवन और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
पुत्रदा एकादशी एवं कजरी तीज (Putrada Ekadashi & Kajari Teej)
24 अगस्त 2026 को श्रावण पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी, जिसे संतान सुख प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है। इसके बाद 30 अगस्त 2026 को कजरी तीज (सातुड़ी तीज) मनाई जाएगी, जो विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं कजरी गीत गाकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और सत्तू का भोग लगाकर व्रत का पारण करती हैं।
सावन मास व्रत के सामान्य नियम (Sawan Fasting Guidelines)
- व्रत के दौरान तामसिक भोजन (प्याज़, लहसुन, मांसाहार) से पूरी तरह परहेज करें।
- फलाहार में साबूदाना, कुट्टू का आटा, सेंधा नमक और फलों का सेवन करें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे।
- मन को शांत रखें और नियमित रूप से शिव मंत्रों का जाप करें।
जिन लोगों ने सभी सावन सोमवार का व्रत रखा है, वे श्रावण पूर्णिमा के दिन हवन और ब्राह्मण भोजन के साथ व्रत का उद्यापन कर सकते हैं।
गृह प्रवेश एवं अन्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat for Griha Pravesh)
चातुर्मास काल होने के कारण अगस्त में विवाह मुहूर्त उपलब्ध नहीं रहते, परंतु गृह प्रवेश, वाहन खरीद और नामकरण जैसे कार्यों के लिए कुछ शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। इनकी सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंडित से कुंडली अनुसार परामर्श लेना उचित रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
रक्षाबंधन 2026 किस तारीख को है? रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
28 अगस्त 2026 को भद्रा काल है या नहीं? भद्रा काल 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए पूरे दिन राखी बांधने के लिए शुभ समय उपलब्ध रहेगा।
नाग पंचमी 2026 कब है? नाग पंचमी 2026 में 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी।
पुत्रदा एकादशी का व्रत किसके लिए फलदायी है? पुत्रदा एकादशी का व्रत मुख्यतः संतान सुख की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए किया जाता है।
अगस्त 2026 में सावन के कितने सोमवार हैं? अगस्त 2026 में सावन के चार सोमवार हैं – 3, 10, 17 और 24 अगस्त।
क्या अगस्त 2026 में विवाह मुहूर्त हैं? नहीं, अगस्त का महीना चातुर्मास काल में आता है, इसलिए इस दौरान विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
इस लेख में हमने Lala Ramswaroop Calendar August 2026 के अनुसार सावन-भाद्रपद मास के सभी प्रमुख व्रत, त्यौहार और रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त की विस्तृत जानकारी साझा की है। रक्षाबंधन, हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस का यह संयोग इस महीने को भक्ति और देशप्रेम दोनों से भर देता है। उम्मीद है कि यह जानकारी आपके अगस्त माह के धार्मिक आयोजनों की योजना बनाने में सहायक रहेगी।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई तिथियाँ और मुहूर्त सामान्य पंचांग गणना पर आधारित हैं। किसी भी व्रत, पूजा या मांगलिक कार्य से पहले कृपया स्थानीय पंडित या ज्योतिषी से समय की पुष्टि अवश्य करें।